Beti Bachao-Beti Padhao
बेटी यह
हमारे देश की
अमूल्य धरोहर है
जिसका हमें सम्मान
करना चाहिए और
हमें उस पर
नाज होना चाहिए
क्यूंकी कहा
गया है की
बिन बेटी आँगन
है सूना ,बिन
आँगन सूना है
घर तो जन्नत
मीडिया प्रोडक्शन की
तरफ से हर
संभव प्रयास है
की लोगों को
बेटी बचाओ बेटी
पढ़ाओ की जानकारी
लोगों को समझाएं
इस नाटक के
माध्यम से ,भ्रूण
हत्या ,लिंग परिक्षण
और शिक्षा का
आभाव यह तीनों
की मुद्दे बेटियों
के लिए एक
श्राप है ,इन
सब बातों को
इस नाटक में
दर्शाया गया
है और लोगों
को प्रेरित किया
गया की वो
जागरूक हो और
बीटा हो या
बेटी उसे अपनी
संतान समझें और
उसमे बराबरी रखे
.
उपस्थित रेलवे
अधिकारी :
प्रकाश का.
काकड़े ( स्टेशन निदेशक)
एस जे
सावंत (स्टेशन मैनेजर)
प्रसाद दशरथ
पांढरे(वरिष्ठ पुलिस
निरीक्षक)
महावीर भाऊ
पाटील (मुम्बई लोहमार्ग
पुलिस)
संचालक: जहीर
शाह
लेखक: विमल उपाध्याय
दिग्दर्शक: निज़ामुद्दीन
शाह
कलाकार:
महेश शिंदे
फिरदोस शेख
अजीत आर्यन
विजय मित्रा
संदीप जैसवार
राजेश कुमार
सुजीत कुमार
धर्मेंद्र तिवारी
अहजम हुसैन
सहयोगी:-
बशीर शाह
शहाबुद्दीन शाह
नीरज राठौड़


